प्रोस्टेटाइटिस क्या है?

प्रोस्टेटाइटिस में, प्रोस्टेट ग्रंथि सूज जाती है और उसका आकार बढ़ जाता है। प्रोस्टेट ग्रंथि पुरुषों में मौजूद होती है। यह मूत्राशय के नीचे और मूत्रवाहिनी के चारों ओर स्थित होती है। इसका आकार अखरोट जैसा होता है। प्रोस्टेट ग्रंथि प्रजनन कार्य में मदद करती है। प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा निकले स्त्राव शुक्राणु में मिलकर वीर्य का निर्माण होता है।

प्रोस्टेट सूजन के कारण –

  • 50 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट का आकार बढ़ना आम है क्योंकि वृद्ध पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन कम हो जाता है। उस स्थिति में, प्रोस्टेट ग्रंथि मुख्य रूप से सूज जाती है।
  • प्रोस्टेट की सूजन मुख्य रूप से मूत्र पथ में जीवाणु संक्रमण के कारण होती है।
  • बैक्टीरिया मूत्रमार्ग के माध्यम से प्रोस्टेट में प्रवेश करते हैं। इससे प्रोस्टेट संक्रमित हो जाता है और सूज जाता है।

प्रोस्टेटाइटिस के लक्षण (Prostatitis symptoms) :

प्रोस्टेटाइटिस में प्रोस्टेट को सुजन आने से प्रोस्टेट का आकार भी बढ़ता है। जब प्रोस्टेट का आकार बढ़ता है, तब मूत्रवाहिनी पर इसका दबाव पड़ता है। इससे पेशाब करते समय दर्द होता है। यह इसका मुख्य लक्षण है। प्रोस्टेट सूजन के और लक्षण नीछे दिए हैं।

प्रोस्टेट सूजन के लक्षण –

  • पेशाब करने में कठिनाई,
  • पेशाब करते समय दर्द होना,
  • पेशाब कम आना,
  • पेशाब देरी से निकलना,
  • बार-बार पेशाब आना,
  • पेट के नीचे श्रोणि वाले हिस्से में दर्द होना,
  • बुखार आना,
  • मतली और उल्टी होना, ऐसे लक्षण प्रोस्टेट सूजन में दिखाई देते है। साथ ही कभी कभी पेशाब में खून भी आ सकता है।

एक्यूट प्रोस्टेटाइटिस (Acute Pancreatitis) :

एक्यूट प्रोस्टेटाइटिस की समस्या अचानक संक्रमण के कारण होती है। इस.स्थिति में तत्काल उपचार करने की आवश्यकता होती है। मुख्यरूप से मूत्रमार्ग के इन्फेक्शन के कारण एक्यूट प्रोस्टेटाइटिस होता है।

क्रोनिक प्रोस्टेटाइटिस (Chronic Pancreatitis) :

इसमें लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। क्रोनिक प्रोस्टेटाइटिस इन्फेक्शन के कारण नहीं होता है और इसका आसानी से इलाज किया जाता है।

प्रोस्टेटाइटिस का निदान –

लक्षणों के आधार पर प्रोस्टेट की सूजन का निदान आपके डॉक्टर कर सकते है। साथ ही वह प्रोस्टेटाइटिस के निदान के लिए, रक्त और मूत्र परीक्षण करने के लिए कह सकते हैं। यूरीन टेस्ट में बैक्टीरिया, खून, वीर्य या शुक्राणु की उपस्थिति है या नहीं इसकी जांच करते हैं। इसके अलावा ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड के जरिए भी इसका निदान किया जाता है।

प्रोस्टेटाइटिस का उपचार –

प्रोस्टेट सूजन का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं और दर्द निवारक के साथ किया जाता है। बैक्टीरिया को खत्म कर एंटीबायोटिक उपचार से प्रोस्टेटाइटिस को पूरी तरह से ठीक किया जाता है।

प्रोस्टेट और पीएसए टेस्ट –

बढ़ती उम्र के कारण होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के सावधानी के लिए साल में एक बार नियमित रूप से प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए टेस्ट) करवाना चाहिए। पचास साल की उम्र के बाद हर साल डॉक्टर से प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच करवानी चाहिए।

जिन पुरुषों की प्रोस्टेट की सर्जरी हुई है, उन्हें भी भविष्य में प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है। इसलिए उन्हें भी नियमित जांच कराते रहना चाहिए। पेशाब में किसी भी तरह की रुकावट या बदलाव को समय रहते नोटिस करना चाहिए। प्रोस्टेट कैंसर धीमी गति से बढ़ रहा है। समय पर इसका पता चल जाए तो इसे रोका जा सकता है।

4 Sources

In this article information about Prostatitis Causes, Symptoms Diagnosis, Types and Treatments in Hindi language.