अग्नाशय कैंसर (Pancreatic Cancer) –

अग्न्याशय की कोशिकाओं में होने वाले कैंसर को अग्नाशय का कैंसर कहा जाता है। इसे “पैंक्रियाटिक कैंसर” के नाम से भी जाना जाता है। अग्नाशय कैंसर की पहचान, कैंसर के गंभीर स्थिति में जाने के बाद होने की सबसे अधिक संभावना है, और यह कैंसर अन्य कैंसर की तुलना में तेजी से फैलता है, इसलिए अग्न्याशय के कैंसर का खतरा अधिक होता है।

अग्नाशय का कैंसर क्या है?

अग्नाशय का कैंसर, अग्न्याशय की कोशिकाओं में होता है। इसे “पैंक्रियाटिक कैंसर” भी कहते है। अग्न्याशय (Pancreas) हमारे शरीर में, पेट और छोटी आंत के पीछे रहनेवाला एक महत्वपूर्ण अंग होता है। अग्न्याशय कई महत्वपूर्ण पाचन स्राव और इंसुलिन का उत्पादन करता है, जो पाचन के लिए आवश्यक हैं। इन ग्रंथियों द्वारा उत्पादित पाचन स्राव आहार में से कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के पाचन में मदद करते हैं। इंसुलिन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। यदि अग्न्याशय से पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं किया जाता है तो इससे मधुमेह हो सकता है। इस प्रकार अग्न्याशय पाचन तंत्र के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अग्नाशय का कैंसर अग्न्याशय की प्रमुख बीमारियों में से एक है। यह 45 से 60 वर्ष आयु के लोगों में अधिक पाया जाता है, जबकि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। अग्नाशय के कैंसर का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है। इसके कुछ सहयोगी कारण निम्नलिखित हैं।

अग्नाशय के कैंसर के कारण –

  • अग्न्याशय में कैंसर कोशिकाओं का निर्माण मुख्य रूप से अग्न्याशय की कोशिकाओं में परिवर्तन, सामान्य कोशिकाओं की मृत्यु और घातक कोशिकाओं के प्रसार के कारण होता है।
  • धूम्रपान और सिगरेट की लत से पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • शराब की लत से पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • कुछ रोग, जैसे मधुमेह, क्रोनिक अग्नाशयशोथ, यकृत विकार ऐसे रोग अग्नाशय के कैंसर का कारण बन सकते हैं।
  • मोटापे के कारण,
  • व्यायाम की कमी,
  • अनुचित आहार, जैसे अधिक खाना, उच्च वसायुक्त आहार,
  • आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों की कमी के कारण,
  • आहार में फलों या सब्जियों से कीटनाशकों का सेवन होने से,
  • औद्योगिक क्षेत्र के कार्यस्थल में रासायनिक जोखिम के कारण,
  • साथ ही, अग्नाशय के कैंसर का पारिवारिक इतिहास होने से आनुवंशिक कारकों के कारण अग्नाशय के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

अग्नाशय के कैंसर के लक्षण आमतौर पर प्रारंभिक अवस्था में प्रकट नहीं होते हैं। हालांकि, अग्नाशय के कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि जैसे ही कैंसर अगले चरण में पहुंचता है, तब उसके लक्षण दिखाई देते हैं। पर किसी भी कैंसर का निदान और उपचार प्रारंभिक अवस्था में करने की आवश्यकता होती है।

अग्नाशय कैंसर के लक्षण –

अग्नाशय के कैंसर के शुरुआती चरणों में निम्नलिखित लक्षण मौजूद हो सकते हैं।

  • भूख में कमी,
  • वजन घटना,
  • पेट के आसपास और पीठ में दर्द होना,
  • पीलिया, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना,
    यह शुरुआती लक्षण अग्नाशय कैंसर में महसूस हो सकते है।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए..?

यदि किसी भी प्रकार के कैंसर का समय पर निदान किया जाता है, तो उचित उपचार से कैंसर पर काबू पाना संभव है। इसलिए आज के समय में सभी को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। यदि आपको भूख न लगना, वजन कम होना, पेट में दर्द और पीलिया जैसे लक्षण हैं, तो अपने डॉक्टर पास जाकर जांच करना महत्वपूर्ण है।

अग्नाशय कैंसर की पहचान –

यदि आपको भूख न लगना, वजन कम होना, पेट में दर्द और पीलिया जैसे लक्षण हैं, तो आपका डॉक्टर आपको अग्नाशय के कैंसर के निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षण करने के लिए कह सकता है।

सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन –
सीटी स्कैन और एमआरआई का उपयोग अग्नाशय के ट्यूमर की जांच के लिए किया जाता है, साथ ही यह निर्धारित करने के लिए कि कैंसर फैल गया है या नहीं।

एंडोस्कोपी जांच-
कैमरे से जुड़ी एक पतली रबर ट्यूब मुंह के माध्यम से पेट में डाली जाती है और अग्नाशय क्षेत्र की स्थिति देखी जाती है। यदि वहां कोई ट्यूमर है, तो बायोप्सी का निदान करने के लिए वहां से एक छोटा सा टुकड़ा लिया जाता है ताकि लैब में जांच करके यह देखा जा सके कि ट्यूमर कैंसर है या नहीं।

इसके अलावा, अग्नाशय के कैंसर के निदान के लिए अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी परीक्षण और कुछ रक्त परीक्षण जैसे CA19-9, बिलीरुबिन टेस्ट करने की आवश्यकता हो सकती है।

पैंक्रियाटिक के कैंसर के चरण –

जब अग्नाशय के कैंसर का निदान किया जाता है, तो इसे अगले चार चरणों में वर्गीकृत किया जाता है।

स्टेज 1 – इसमें केवल अग्न्याशय में कैंसर की वृद्धि शामिल है।
स्टेज 2 – कैंसर अग्न्याशय और उसके आस-पास के पेट, पित्त नलिका और आंतों में फैलता है।
स्टेज 3 – कैंसर अग्न्याशय और उसके आस-पास के अंगों और महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं में फैल गया है।
स्टेज 4 – कैंसर अग्न्याशय और आस-पास के अंगों और साथही रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैलता है।

अग्नाशय कैंसर का उपचार (Pancreatic Cancer treatment) :

अग्नाशय के कैंसर का उपचार कैंसर के चरण पर निर्भर करता है। कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना और कैंसर के प्रसार को रोकना उपचार के दो मुख्य उद्देश्य होते है। वजन घटाने, एनीमिया, आंत्र रुकावट, पेट दर्द, मधुमेह या यकृत फेल्युअर जैसी कई जटिलताएं भी इस कैंसर के उपचार में बाधा उत्पन्न सकती हैं। अग्नाशय के कैंसर के उपचार में सर्जरी, विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) और कीमोथेरेपी शामिल होते हैं।

अग्नाशय कैंसर की सर्जरी –

अग्नाशय के कैंसर के लिए सर्जरी प्रमुख उपचार है। यदि कैंसर का ट्यूमर अग्न्याशय में है, तो कैंसर के पहले और दूसरे चरण में सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें अग्न्याशय के कैंसर वाले हिस्से के साथ-साथ छोटी आंत और पित्त नली कुछ भाग शल्य चिकित्सा से हटा दिया जाता है। इस सर्जरी को व्हिपल्स ऑपरेशन्स (Whipples Operations) के नाम से जाना जाता है।

विकिरण उपचार (Radiation Therapy) –

यदि अग्नाशय का कैंसर अन्य क्षेत्रों में फैल गया है, तो विकिरण चिकित्सा को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें रेडिएशन से कैंसर कोशिकाएं को नष्ट किया जाता हैं।

कीमोथेरेपी (Chemotherapy treatment) –

कभी-कभी डॉक्टर सर्जरी और विकिरण जैसे उपचारों में कीमोथेरेपी का उपयोग भी करते है। कीमो दवाएं कैंसर कोशिकाओं को मारती हैं और उनके विकास को रोकती हैं।

अग्नाशय कैंसर के लक्षण आमतौर पर प्रारंभिक अवस्था में प्रकट नहीं होते हैं। चूंकि पेट में दर्द, पीलिया और वजन घटाने जैसे सामान्य लक्षणों की तुलना में अग्नाशय के कैंसर का पता नहीं चलने की संभावना अधिक होती है, इसलिए कैंसर का पहचान होने तक इसके फैलने की संभावना अधिक होती है। हालांकि, किसी भी कैंसर का निदान और उपचार प्रारंभिक अवस्था में करने की आवश्यकता होती है। गंभीर अग्नाशय का कैंसर लाइलाज है, यही वजह है कि अग्नाशय कैंसर से मरने वालों की संख्या अधिक होती है।

अग्नाशय के कैंसर से बचाव के लिए केयर टिप्स –

  • धूम्रपान, सिगरेट जैसे व्यसनों से बचें,
  • शराब, अल्कोहल से दूर रहें,
  • नियमित रूप से व्यायाम करें, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
  • वजन को नियंत्रित रखें।
  • यदि आपको मधुमेह है, तो आपको दवा, उचित आहार, व्यायाम और नियमित जांच के माध्यम से अपने मधुमेह को नियंत्रित करना चाहिए।
  • वसायुक्त भोजन और तले हुए खाद्य पदार्थ परहेज करें।
  • आहार में अधिक सब्जियां और फल शामिल करने चाहिए।
  • बाजार से लाए गए फलों और सब्जियों को धोकर खाना चाहिए क्योंकि उन पर कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है।
  • यदि परिवार में किसी को अग्नाशय का कैंसर हुआ है, तो आपको सावधानी बरतनी चाहिए और नियमित रूप से जांच करानी चाहिए।
  • यदि आपके पेट में दर्द या पीलिया जैसे लक्षण हैं, तो अपने चिकित्सक से चिकित्सा सहायता और निदान प्राप्त करें।
  • पीलिया होने की स्थिति में घरेलू उपाय में वक्त जाया न करके अपने डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए।
5 Sources

In this article information about Pancreatic Cancer Causes, Symptoms, Diagnosis and Treatments in Hindi language.