लिवर कैंसर –

लिवर में होने वाले कैंसर को ‘लिवर कैंसर’ कहते है। लिवर हमारे शरीर का एक बड़ा आंतरिक अंग होता है। लिवर के कई महत्वपूर्ण कार्य होते है। पचनक्रिया में विटामिन जैसे पोषक तत्वों को अवशोषित करना, पित्त का निर्माण करना, शरीर से हानिकारिक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना, ऐसे महत्वपूर्ण कार्य लिवर द्वारा किए जाते है। लिवर का कैंसर होने से लिवर की कोशिकाए नष्ट होती है। इस कारण लिवर के कार्य पर इसका गंभीर परिणाम होने लगता है।

लिवर कैंसर क्या है?

लिवर कैंसर का प्रायमरी और सेकेंडरी ऐसे दो मुख्य प्रकार होते हैं। प्रायमरी यकृत कैंसर यह यकृत की कोशिकाओं में ही शुरू होता है। और जब शरीर के अन्य जगह से कैंसर कोशिकाएं लिवर में आकर फैल जाती है तो उसे सेकेंडरी लिवर कैंसर कहते हैं, इस स्थिति को metastasis इस नाम से भी जाना जाता हैं ।

लिवर कैंसर के शुरुआती चरणों में कोई विशिष्ट लक्षण नहीं होते हैं। और जैसे बीमारी आगे बढ़ती है, तब पीलिया जैसे लक्षण दिखाई देते है। लिवर कैंसर के उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा), और टार्गेटेड ड्रग थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।

यकृत कैंसर के प्रकार (Types of Liver Cancer) –

1) हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (Hepatocellular carcinoma) –
इस प्रकार का लिवर कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाता है। लगभग 85 से 90 % लिवर कैंसर के मरीज इसी प्रकार के होते हैं। इसे हेपेटोमा भी कहते है। हेपेटाइटिस बी या सी के इन्फेक्शन या शराब का अतिसेवन, लिवर सिरोसिस, फैटी लिवर इन कारणों के कारण इस प्रकार का यकृत कैंसर होता हैं। यह कैंसर यकृत के मुख्य कोशिकाएं (हेपेटोसाइट्स) में विकसित होता है।

2) लिवर एंजियोसारकोमा (Angiosarcoma) – यह लिवर कैंसर का एक बहुत ही दुर्लभ प्रकार होता है। लगभग 1 प्रतिशत यकृत कैंसर के मामले इस प्रकार के होते हैं।

3) पित्त नली का कैंसर (Bile duct cancer) – यह कैंसर यकृत से जुड़े हुए पित्त नलिका (bile duct) में होता। इस नली के माध्यम से पित्त यकृत से पित्ताशय की थैली में जाता है। यह लिवर कैंसर का प्रकार भी दुर्लभ होता है।

4) हेपाटोब्लास्टोमा – यह अत्यंत दुर्लभ प्रकार का यकृत कैंसर है। यह लगभग तीन साल से कम उम्र के बच्चों में पाया जाता है।

यकृत में कैंसर दो तरह से हो सकता है।

1) प्रायमरी लिवर कैंसर –
जब लिवर में कोशिकाएं विपरीत रूप से परिवर्तित होती हैं और उनका विकास और विभाजन अनियंत्रित होने लगता है तो लिवर का कैंसर, लिवर में विकसित होता है। इसे प्राइमरी लिवर कैंसर कहा जाता है। यदि समय पर इसमें इलाज नहीं किया जाता है, तो प्राथमिक यकृत कैंसर का प्रसार शरीर के फेफड़ों और हड्डियों में फैल सकता है।

2) मेटास्टेटिक लिवर कैंसर –
शरीर के अन्य हिस्सों से कुछ कैंसर कोशिकाएं यकृत में रक्त प्रवाह से प्रवेश करती हैं और यकृत में कैंसर का प्रसार होता हैं।

लिवर कैंसर होने का खतरा किसे अधिक होता है?

  • जो लोग शराब, सिगरेट इसके आधीन है उनमें लिवर कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
  • जिनको पेट का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, किडनी का कैंसर या गर्भाशय का कैंसर हुआ है उनमें मेटास्टेटिक लिवर कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।

लिवर कैंसर के कारण (Liver Cancer Causes) –

  • हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ विषाणुओं के इन्फेक्शन से लिवर कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
  • लिवर सिरोसिस के कारण,
  • जिगर की अनुवांशिक बीमारी जैसे हेमोक्रोमैटोसिस और विल्सन रोग के कारण लिवर कैंसर हो सकता है।
  • नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर से लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • मोटापा, व्यायाम की कमी, डायबिटीज के कारण लिवर कैंसर होने का धोका अधिक बढ़ता है।
  • शराब की लत, धूम्रपान और सिगरेट की लत ये सभी यकृत के कारण बन सकते हैं।

लिवर कैंसर के लक्षण (Liver Cancer Symptoms) –

लिवर कैंसर के शुरुआती स्टेज में कोई लक्षण अधिकांश लोगों में दिखाई नहीं देते हैं। पर जैसे जैसे लिवर कैंसर बढ़ता है तब, लक्षण महसूस होने लगते हैं। लिवर कैंसर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं-

  • पीलिया (Jaundice) होना। त्वचा और आंखों में पीलापन आता है।
  • सफेद रंग का मल होना।
  • वजन कम होना।
  • भूख में कमी।
  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द होना।
  • पेट में सूजन आना।
  • पेट में पानी भरना।
  • उल्टी, जी मिचलाना।
  • शरीर में कमजोरी और थकान महसूस होना।

ऐसे लक्षण इसमें दिखाई दे सकते हैं।

लिवर कैंसर की पहचान (Diagnosis) –

लिवर कैंसर के निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षणों की आवश्यकता होती है,

  • लिवर बायोप्सी परीक्षण – लिवर कैंसर का संदेह होने पर लिवर बायोप्सी की जाती है। इसमें जांच के लिए बायोप्सी सुई से लिवर का एक छोटा सा टुकड़ा निकालकर लैब में भेजा जाता है।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट – रक्त में प्रोटीन, लिवर एंजाइम और बिलीरुबिन के स्तर की जांच इस टेस्ट में की जाती है।
  • इसके अलावा सोनोग्राफी, सीटी स्कैन, पीईटी स्कैन, एमआरआई स्कैन, लिवर स्कैन, अल्फा-फेटोप्रोटीन (एएफपी रक्त परीक्षण) जैसे परीक्षण लिवर कैंसर की पहचान के लिए किए जा सकते हैं।

लिवर कैंसर का इलाज (Liver Cancer Treatment) –

लिवर कैंसर किस स्टेज में है, ट्यूमर की संख्या, आकार और स्थान, वह कैंसर कितना बढ़ा हुआ है, रुग्ण की स्थिति कैसी है इन सभी के आधार पर, उपचार विकल्प का चयन डॉक्टर करते हैं। लिवर कैंसर में उपचार के निम्नलिखित विकल्प होते हैं।

हेपेटेक्टोमी सर्जरी – हेपेटेक्टोमी ऑपरेशन में, लिवर का बाधित भाग हटा दिया जाता है। यह सर्जरी आमतौर पर तब की जाती है जब कैंसर लिवर तक ही सीमित होता है।

लिवर ट्रांसप्लांट – इसमें रोगी का लिवर ऑपरेशनद्वारा हटाकर दूसरे व्यक्ति का लिवर ट्रांसप्लांट किया जाता हैं।

कीमोथेरेपी – कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

रेडिएशन थेरपी – इसमें कैंसर की कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन किरणों का उपयोग किया जाता है।

इसके अलावा रेडियो फ़्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) और ट्रांसएर्टियल कीमो एम्बोलिज़ेशन (TACE) जैसी उन्नत विधियों को लिवर कैंसर के उपचार लिए विकसित किया गया है।

लिवर कैंसर से बचाव (Prevention of Liver Cancer) –

लिवर कैंसर से बचाव के कोई निश्चित तरीके नहीं हैं। लेकिन निम्नलिखित उपायों से लिवर कैंसर के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए,

  • हेपेटाइटिस से बचाव के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।
  • शराब, तंबाखू, धूम्रपान इन बुरी आदतों से लिवर की सेहत को नुकसान होता है। इससे हैपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस जैसी लिवर की बीमारी होती है. इसलिए इन आदतों से दूर रहें ।
  • अधिकतरमरीजों में लिवर कैंसर का निदान उसके सेकंड स्टेज में पहुंचने के बाद ही होता है। और सेकंड स्टेज में इसका इलाज करना मुश्किल होता है। इसलिए डॉक्टर के पास जाकर नियमित जांच जरूर कर ले।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • अपना वजन नियंत्रित रखें।
  • आहार में हरी सब्जियां, ताजे फल, ड्राय फ्रूट्स, अनाज इनका अधिक सेवन करें।
4 Sources

In this article information about Liver Cancer Causes, Symptoms, Types, Treatment, and Diagnosis in Hindi language.